बिहार में फेल रहा खुफिया तंत्र IB और स्पेशल ब्रांच के पास कोई इनपुट नहीं 70 एफआईआर व 325 उपद्रवी गिरफ्तार

सेना की अग्निपथ योजना के खिलाफ शुक्रवार को बिहार के कई जिलों में तीसरे दिन भी जमकर उपद्रव हुआ। इस दौरान 27 रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ और आगजनी की गई तथा 14 ट्रेनों को फूंक दिया गया। शुक्रवार शाम उपद्रव को देखते हुए राज्य के 15 जिलों में अगले 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर खुफिया जानकारी जुटाने वाली एजेंसियों से लेकर पुलिस तक को इस बड़े आंदोलन की भनक क्यों नहीं लगी। किसी को भी नहीं पता था कि बुधवार और गुरुवार के विरोध-प्रदर्शन के बावजूद शुक्रवार को गुस्साए युवाओं का विरोध-प्रदर्शन इतना विकराल रूप ले लेगा।

शुक्रवार को हुए बवाल के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो और बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच की कार्यशैली बड़े सवाल खड़ा करती है। सूत्रों के अनुसार इन दोनों ही एजेंसियों के पास किसी प्रकार का कोई अनुमान नहीं था। गुरुवार को ही बिहार पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने बताया था कि भोजपुर, बक्सर, सारण सहित जिन जिलों में सेना बहाली के लिए लोग सबसे अधिक तैयारी करते हैं, वहां अधिक संख्या में फोर्स दिए गए हैं। जगह-जगह पुलिस फोर्स की तैनाती भी की गई है। मगर, इनकी तैनाती कम पड़ गई। शुक्रवार को पुलिस का सारा अनुमान फेल हो गया।

इस बीच पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों ने बताया कि उपद्रव में शामिल युवकों को आने वाले दिनों में सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। उपद्रव में शामिल होने के चलते उन पर एफआईआर दर्ज होगी और चार्जशीट होने के बाद नियम के तहत वह सरकारी की किसी भी योजना का लाभ लेने के काबिल नहीं रहेंगे।

पुलिस मुख्यालय के मुताबिक हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की घटनाओं को लेकर राज्यभर में अब तक 70 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं 325 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है। यह संख्या और बढ़ेगी। शुक्रवार को हुई हिंसा में उपद्रवियों ने कई ट्रेनों में आग लगी दी और स्टेशनों पर तोड़फोड़ के अलावा पथराव किए गए। कई जगहों पर सड़कें जाम कर प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं।

इनपुट : लाइव हिंदुस्तान

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