क्लाइमेट चेंज उत्तर बिहार का मौसम चक्र बदल रहा तेजी से गर्मी में झमाझम बारिश मानसून रह

पिछले 13 वर्षों से हर साल उत्तर बिहार का मौसम चक्र तेजी से बदल रहा है। गर्मी के समय रह-रह कर बारिश होती है। लेकिन, मानसून प्यासा रह जा रहा है। जिस वर्ष काफी कम बारिश होती है, उसके अगले वर्ष अत्यधिक बारिश हो रही है। अब तक धारणा रही है कि जेठ में अधिक गर्मी होने पर सावन में बारिश होती है। पिछले दो वर्षों से यह धारणा भी खत्म हो रही है।

जिले में सामान्य रूप से पूरे वर्ष में 1135 एमएम बारिश होती है। लेकिन, वर्ष 2009 में 723 मिमी तो 2010 में 697 मिमी बारिश के बाद 2011 में 1245 मिमी बारिश हुई है। 2014 को छोड़ कर बाकी के वर्षों में 2018 तक औसत से काफी कम बारिश हुई। लेकिन, पिछले तीन वर्ष से मई में बारिश का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मई में औसत 47.8 मिमी बारिश होती है। लेकिन, पिछले दो वर्षों में यह क्रमश: 106 व 281 एमएम बारिश हुई है। जबकि, 2022 में अब तक 96 बारिश हो चुकी है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण तेजी से बदल रहा मौसम, मानसून पूर्व हो रही है अधिक बारिश

पूसा कृषि मौसम परामर्शी सेवा के नोडल अधिकारी डॉ. ए. सत्तार के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम चक्र में इस प्रकार के बदलाव आ रहे हैं। लगातार शहर का बढ़ता दायरा, बढ़ती आबादी के साथ ही पेड़-पौधों के कटने तथा औद्योगिकरण होने से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है।

दो वर्षों से बारिश के बाद जलजमाव से रबी फसल की बुआई हुई मुश्किल

प्रगतिशील किसान सतीश कुमार द्विवेदी के अनुसार, दो वर्षों से अधिक जलजमाव होने से रबी की फसल की बुआई भी मुश्किल हो रही है। लेट से बुआई करने से किसानों को कम उत्पादन होने से घाटा होता है। मानसून पूर्व अधिक बारिश होने से फसल कटाई के बाद खाली हुए खेत सूख नहीं पाते हैं। इसके कारण कीटनाशक का अधिक इस्तेमाल करना पड़ता है।

धान का बिचड़ा गिराने के समय ही अधिक बारिश होने से बिचड़ा गिराना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद मानसूनी बारिश नहीं होने से फसल सूखने तथा अधिक बारिश होने पर उसके गल जाने का खतरा होता है।

इनपुट:-दैनिक भास्कर

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