पाताल से भी शराब ढूंढ लेते हैं ये कुत्तेएक स्नीफर डॉग पर 2 लाख तक खर्च हर महीने 5 हजार रुपए की खुराक

बिहार में शराब को पकड़ने के लिए बिहार पुलिस ट्रेंड अल्कोहल स्नीफर डॉग की मदद ले रही है। हर पुलिस रेंज में इनकी तैनाती की गई है। इन कुत्तों ने अब तक 4211 रेड में करीब 85 हजार लीटर शराब पकड़ी है, 1069 आरोपियों को गिरफ्तार भी करवाया है। लेब्राडोर नस्ल के इन कुत्तों को खासतौर पर शराब को पकड़ने के लिए ट्रेंड किया गया है।

बिहार पुलिस ने साल 2018 में तेलंगाना से ऐसे 20 कुत्तों की खरीद की थी और हैदराबाद स्थित इंटीग्रेटेड इंटेलीजेंस ट्रेनिंग एकेडमी (आईआईटीए) में बाकायदा 9 महीने तक इनकी ट्रेनिंग हुई। एक कुत्ते की खरीद और ट्रेनिंग पर 1 लाख 70 हजार से 2 लाख रुपए तक खर्च किए गए हैं। इन कुत्तों के खाने पर हर महीने औसत पांच हजार रुपए का खर्च आता है। इन्हें डॉग फूड खिलाया जाता है। इनमें कई तरह की बिस्किट और दूसरे फूड होते हैं। कहा जाता है कि पैक शराब की खेप हो या फिर जमीन में गाड़ कर रखी गई शराब, अल्कोहल स्नीफर डॉग से बचना मुश्किल है।

बिहार ऐसा करने वाला पहला राज्य

पुलिस और दूसरी एजेंसियां विस्फोटक और मादक पदार्थों को सूंघकर पकड़ने वाले कुत्तों का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन बिहार पहला राज्य है जिसने शराब पकड़ने वाले कुत्तों की तैनाती की है। ऐसे 20 कुत्ते थे, अभी 17 हैं। तीन की मौत हो चुकी है। अल्कोहल को सूंघने की क्षमता कम न हो इसके लिए इनका रिफ्रेसर कोर्स भी कराया जाता है। करीब तीन महीने पहले ही इन्हें कोर्स कराया गया है।

शराब मिलते ही करते हैं इशारे

डॉग स्क्वॉयड से जुड़े कर्मियों के अनुसार जांच के दौरान अगर इन कुत्तों को किसी ट्रक में शराब का पता चलता है तो वे उस ट्रक के पास जाकर बैठ जाते हैं और बार-बार भोंककर खास संकेत देते हैं। अगर शराब को गाड़ कर रखा जाता है तो अपने पंजे से वहां की जमीन खोदकर संकेत देते हैं।

इनपुट दैनिक भास्कर

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