14 जनवरी को ही मनेगी मकर संक्रांति, पूरे दिन रहेगा पुण्यकाल

  • इस बार पंडितों का है एक मत

संवाददाता । पुनीत झा

मुजफ्फरपुर। इस बार मकर संक्रांति को लेकर सभी पंडितों में एक मत है। सभी 14 जनवरी को ही इस त्योहार के मनाए जाने की पक्ष में हैं। आध्यात्मिक गुरु पंडित कमलापति त्रिपाठी ‘प्रमोद’ बताते हैं कि निर्णयसिंधु और मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार सर्वसम्मत है कि संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति के 16 घटी पूर्व और 16 घटी बाद तक होता है। इस कारण 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पुण्य पर्व मनाया जायेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है।

स्नान, दान, जप, तप, यज्ञ, अनुष्ठान और हवन के लिये पुण्यकाल सुबह 8:18 से शुरू होकर संध्या पर्यन्त रहेगा। महापुण्यकाल 8:30 सुबह से 10:17 तक होगा। पटना के डॉ. श्रीपति त्रिपाठी, बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक, आचार्य सुनेता तिवारी, आचार्य श्रीदत्त मिश्र, आचार्य अभिनव पाठक, पंडित प्रभात मिश्र, पंडित धीरज झा धर्मेश, पंडित जयकिशोर मिश्र, सुमन तिवारी, रविरंजन तिवारी, धर्मेंद्र तिवारी, सुनील मिश्र, अभय तिवारी, सुबोध पाण्डेय, रंजीत मिश्र, आशुतोष ओझा, सुनील पाण्डेय आदि पंडितों ने भी सर्वसम्मति से यह कहा है कि किसी शास्त्रीय सिद्धांत से 15 को मकर संक्रांति नहीं मनेगा।

यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है । इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तपर्ण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है । ऐसी धारणा है, कि इस दिन किया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है | सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के कारण यह पर्व ‘मकर संक्रांति’ व ‘देवदान पर्व’ के नाम से भी जाना जाता है ।

इसका है वैज्ञानिक महत्व

कहा जाता है कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का योग बनता है, लेकिन इसके अलावा भी कई सारे बदलाव आते हैं । मकर संक्रांति का संबंध केवल धर्म से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक व कृषि से भी इसका जुड़ाव है। इस दिन से सभी शुभ कार्य शुरू होते हैं।

वैज्ञानिक महत्व की बात करें तो इस अवधि में सभी नदियों में वाष्पन क्रिया होती है । जो कई बीमारियों को दूर करने में सहायक माना जाता है। इस दिन नदियों में स्नान करने के लिए कहा जाता है, ताकि लोगों की शारीरिक दुर्बलता खत्म हो जाए।इस मौसम में तिल और गुड़ खाना काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर को गर्म रखता है । तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने से शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तारायण में सूर्य के ताप शीत को कम करता है । इस दिन खिचड़ी भी खायी जाती है। यह सेहत के लिए लाभकारी है । इससे पाचन क्रिया सुचारू रूप से संचालित होती है ।

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