प्यार का आए यकीन…बेगम के लिए ले ली चांद पर जमीन

पुराने जमाने के नवाब और उनकी मुहब्बत के किस्से का सच आज भी हो रहा बयां

शहर के हकीम अंसारी ने बेगम को निकाह की सालगिरह पर तोहफा देने को लिया चांद पर 5 एकड़ जमीन
15 अक्टूबर को देंगे बेगम राबिया को देंगे तोहफा

पिछले साल नवंबर में शुरू की थी प्रक्रिया, मिला जमीन की रजिस्ट्री सम्बंधित दस्तावेज

मुजफ्फरपुर। अनामिका,वरीय संवाददाता
चांद मेरा दिल है…मेरी बेगम को यह गाना बेहद पसंद है। ऐसे में हमने अपने दिल यानि बेगम के लिए चांद पर जमीन खरीद ली। गुरुवार 15 अक्टूबर को हमारी निकाह की सालगिरह है और उसी दिन उन्हें यह तोहफे के तौर पर दे रहा हूं। अपने बेटे की बीमारी की वजह से हम पांच साल से दूर रहे हैं। छह साल हमारे निकाह को हुए हैं। शहर के हकीम अंसारी के ये जज्बात पुराने जमाने के नवाबों और उनकी मुहब्बत के किस्से को आज भी सच के रूप में सामने ला देते हैं।

चंदा रे कभी तो जमीं पर आ..चांद जमीन पर ना आए मगर चांद पर ही जमीन खरीद कर किसी की ख्वाहिश पूरी कर दे तो। मिठनपुरा निवारी हकीम अंसारी ऐसे ही श्ख्स हैं जिन्होंने अपनी बेगम राबिया खातून के नाम से चांद पर पांच एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराई है। टूर एंड ट्रेवल्स बिजनेस से जुड़े हकीम कहते हैं कि 2014 में मेरा निकाह हुआ और 2015 में मेरा बेटा जो ऑटिज्म बीमारी से ग्रसित है। दिल्ली में पिछले पांच साल से उसका ट्रीटमेंट चल रहा है। मैँ कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे मेरा वजूद रहे ना रहे, मेरा तोहफा यादगार बन जाए।

लूनर सोसाइटी इंटरनेशनल में कराया रजिस्ट्रेशन, जटिल थी प्रक्रिया
हकीम बताते हैं कि कई सारे फ्रॉड वेबसाइट भी इससे संबंधित हैं। ऐसे में सबसे पहले नासा के अपने एक दोस्त की मदद से नवम्बर 2019 में लूनर सोसाइटी इंटरनेशनल के माध्यम से इस प्‍लॉट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया। यह ऑथराइज्ड है और अंटलाटा में है। इसके बाद सोसाइटी द्वारा मांगे गए दस्तावेजों को ऑनलाइन भरा। अप्रैल में मुझे बताया गया कि मेरा रजिस्ट्रेशन मंजूर कर लिया गया। तय राशि सोसाइटी के खाते में ऑनलाइन जमा किया। वे कहते हैं कि प्लॉट की कीमत से ज्यादा दस्तावेजों की प्रक्रिया जटिल और लंबी है। हकीम कहते हैं कि मुझे अपने निकाह की सालगिरह पर बेगम को यह तोहफा देना था, यह मैंने फॉर्म में भरा था। मुझे अभी सितम्बर में ऑनलाइन पीडीएफ के माध्यम से प्लॉट का दस्‍तावेज भी भेज दिया गया। कूरियर से भी मुझे यह भेजा गया है। हकीम कहते हैं कि बिहार से मैं पहला हूं जिसने 5 एकड़ जमीन ली है। इससे पहले यहां के एक व्यक्ति ने एक एकड़ जमीन लिया था। जमीन की कीमत पूछने पर हकीम कहते हैं कि तोहफे की कीमत बताई नहीं जाती।

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