हाईकोर्ट के आदेश से लोगों को राहत, चुनाव कार्य के लिए निजी वाहनों की जब्ती पर रोक

बिहार विधानसभा चुनाव कार्य में निजी वाहन की जब्ती में प्रशासन फूंक-फूंककर कदम उठा रहा है। पटना हाईकोर्ट के पूर्व के आदेशानुसार गाड़ी प्राइवेट है कि कमर्शियल यह जानकारी प्राप्त करना अधिकारी का काम है न कि गाड़ी मालिक और ड्राइवर को बताना है।

कोर्ट ने निजी गाड़ी को चुनाव कार्य में लगाये जाने पर राज्य सरकार को पांच हजार रुपये बतौर क्षति पूर्ति देने का आदेश दे रखा है। वहीं, डीएम को अदालती आदेश को नजरअंदाज कर प्राइवेट गाड़ी को जब्त किये जाने पर अपने पॉकेट से पांच हजार रुपए देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति आरएस गर्ग की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई की थी। कोर्ट को बताया गया था कि अधिकारी चुनाव कार्य के लिए गाड़ी को जब्त कर लिये। लाख आरजू मिन्नत किये जाने के बावजूद गाड़ी को नहीं छोड़ा गया। उन्हें गाड़ी प्राइवेट होने की बात बताई गई लेकिन अधिकारी एक नहीं सुने। वहीं, डीएम की ओर से जवाबी हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया गया कि गाड़ी प्राइवेट है, इस बात की जानकारी अधिकारी को गाड़ी मालिक और ड्राइवर ने नहीं दी थी।

कोर्ट ने डीएम की ओर से दी गई जानकारी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रत्येक गाड़ी का पूरा विवरण जिला परिवहन विभाग में रहता है। अधिकारी का काम है यह पता करना कि गाड़ी प्राइवेट है कि कामर्शियल। कोर्ट ने राज्य सरकार और डीएम की हर दलील को नामंजूर करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने पूर्व में ही आदेश जारी कर कहा है कि चुनाव कार्य के लिए प्राइवेट गाड़ी को जब्त नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद अधिकारी प्राइवेट गाड़ी को चुनाव कार्य के लिए जब्त किये। कोर्ट ने राज्य सरकार को बतौर क्षतिपूर्ति पांच हजार तथा डीएम को अदालती आदेश को नजरअंदाज कर गाड़ी जब्त किये जाने पर अपने पॉकेट से पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि तय समय के भीतर राशि का भुगतान नहीं किये जाने पर कोर्ट अवमानना के दोषी होंगे।

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