निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए नहीं बनी सहमति, अब डीएम लेंगे फैसला

निजी अस्पताल व नर्सिंग होम में कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर संचालकों के साथ सहमति नहीं बन सकी। वे कोरोना के इलाज के लिए स्वेच्छा से अस्पताल नहीं देंगे। शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय में हुई बैठक में निजी अस्पताल व नर्सिंग होम संचालकों ने सदर अस्पताल प्रबंधन से कहा कि कोरोना इलाज के लिए स्वेच्छा से अस्पताल नहीं दे सकते हैं। यदि सरकार आदेश जारी कर इन अस्पतालों को कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए लेना चाहती है तो ले सकती है।

सदर अस्पताल के एसीएमओ डॉ. विनय कुमार ने बताया कि निजी अस्पताल व नर्सिंग होम संचालकों ने कहा है कि सरकार के आदेशानुसार निजी नर्सिंग होम को जिला प्रशासन कोरोना इलाज के लिए चिह्नित कर ले। उन्होंने बताया कि स्वेच्छा से निजी अस्पताल को संचालक कोरोना इलाज के लिए नहीं देना चाह रहे हैं। एसीएमओ ने बताया कि सरकार का आदेश है कि जिले के 25 प्रतिशत निजी अस्पतालों में कोरोना की जांच होगी। अब डीएम को निर्णय लेना है कि निजी नर्सिंग होम में कोरोना का इलाज कैसे शुरू कराया जाए।

बता दें कि डीएम की अध्यक्षता में बीते सप्ताह निजी अस्पतालों में कोरोना इलाज शुरू करने को लेकर नर्सिंग होम संचालकों और आईएमए के बीच बैठक हुई थी। बैठक में डीएम ने संचालकों से स्वेच्छा से निजी नर्सिंग होम में कोरोना इलाज करने की सहमति देने को कहा था। इसपर संचालकों और आईएमए की ओर से एक सप्ताह का समय जवाब देने के लिए मांगा गया था। इसके बाद शुक्रवार को डीएम के निर्देश पर सिविल सर्जन कार्यालय में निजी नर्सिंग होम संचालकों की बैठक बुलाई गई थी।

कर्मियों के नर्सिंग होम छोड़ने का है डर
बैठक में नर्सिंग होम संचालकों में से कुछ अपने नर्सिंग होम को कोरोना इलाज के लिए देने पर राजी थे, लेकिन उनका कहना था कि यदि सब नर्सिंग होम संचालक के बीच सहमति नहीं बनती है तो वहां कोरोना इलाज करना संभव नहीं होगा। क्योंकि जहां कोरोना का इलाज होगा वहां से उनके स्वास्थ्य कर्मी और अन्य कर्मचारी कोरोना के डर से नर्सिंग होम छोड़ दूसरे नर्सिंग होम ज्वाइन कर लेंगे।

Input – Hindustan

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