अच्छी खबर : बिहार में सब्जी उत्पादकों के लिए होगी ‘अपनी मंडी’, ऑनलाइन खरीदारी भी होगी

देश के किसी भी शहर में बैठा व्यापारी बिहार की सब्जी ऑनलाइन खरीद सकेगा। सौदा ऑनलाइन तय होगा और तय समय में आपूर्ति की व्यवस्था यहां की समिति करेगी। इसके लिए सहकारिता विभाग के अधीन बना वेजफेड राज्य के सभी प्रखंडों में प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति (पीवीसीएस) का निर्माण करेगा। साथ ही उसे इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग (ईनाम) से भी जोड़ा जाएगा। उसके अंदर स्थानीय लोगों के लिए ‘अपनी मंडी’ भी होगी।

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पूरी योजना को ईनाम से जोड़ने में तो थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन राज्य के अंदर खरीद-बिक्री की व्यवस्था जल्द ही होगी। राज्य के 37 प्रखंडों में पीवीसीएस के लिए वेजफेड ने जमीन की व्यवस्था कर ली है। इसमें पटना की समिति से जुड़े 25 और तिरहुत की समिति से जुड़े 12 प्रखंडों में जमीन की व्यवस्था हुई है। जमीन समितियों की लीज पर लेना होता है। इसके लिए जमीन की खरीद सरकार नहीं करती है। शेष प्रखंडों में जमीन की तलाश जारी रहेगी लेकिन इस बीच जहां जमीन मिल गई वहां निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। निर्माण की जिम्मेवारी राज्य भवन निर्माण निगम की होगी। इसका टेंडर जल्द ही जारी होगा।

पीवीसीएस का विस्तार दस हजार वर्गफीट में होगा। इस परिसर के अंदर सब्जियों की छंटनी, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की व्यवस्था होगी। सब्जियां खराब नहीं हो इसके लिए वहां दस टन की क्षमता वाला मल्टी चैम्बर कोल्ड स्टोरेज भी होगा। साथ ही परिसर के भीतर ही आठ दुकानों का एक अलग बाजार होगा। इस बाजार से स्थानीय लोग खुदरा सब्जी खरीद सकेंगे। इसके अलावा सब्जी उत्पादक किसानों को बीज, खाद और कीटनाशी के अलावा सभी प्रकार के उपादान भी वहां उपलब्ध होंगे। पूरी व्यवस्था के संचालन की जिम्मेवारी पीवीसीएस की होगी।

सहकारिता विभाग ने कंफेड की तरह वेजफेड का गठन किया तो यह संस्था अपने उदेश्य को पूरा करने के लिए तेजी से काम में लग गई है। नई व्यवस्था जिन प्रखंडों में होगी वहां के सब्जी उत्पादकों के लिए बाजार की समस्या दूर हो जाएगी। साथ ही आसपास के लोगों को भी सस्ती और ताजी सब्जी उस बाजार से मिल सकेगी। ईनाम से जुड़ जाने के बाद तो राज्य के सब्जी उत्पादकों की आमदनी में भी काफी इजाफा हो जाएगा। कीमत के मामले में उनकी प्रतिस्पर्धा देश स्तर पर होगी।

योजना एक नजर में
10 हजार वर्गफीट में होगा परिसर
08 खुदरा दुकानें भी होंगी परिसर में
534 प्रखंडों में होनी है व्यवस्था
37 प्रखंडों के लिए मिल गई है जमीन

इनपुट : हिन्दुस्तान

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