आज मनाई जा रही धूमधाम से गोपाष्टमी, गौशालाओं में भव्य आयोजन

कार्तिक शुक्ल अष्टमी पर गोपाष्टमी पर्व पर गो रक्षा का संकल्प, जानिए गो पूजन की विधि और पुण्‍यकाल

सनातन धर्म में कार्तिक शुक्ल अष्टमी की मान्यता गोपाष्टमी की है। इस बार गोपाष्टमी चार नवंबर को पड़ रही है। अष्टमी तिथि चार नवंबर की भोर 5.13 बजे लग रही है जो पांच नवंबर की भोर 6.25 बजे तक रहेगी।

ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार तिथि विशेष पर गो माता को स्नान करा कर पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। सुंदर वस्त्रादि से अलंकृत कर गोवंश का भी पूजन करना चाहिए। माताओं को घास-फल-फूल समेत उन्हें प्रिय खाद्य खिलाकर परिक्रमा और उनके साथ थोड़ा समय व्यतीत करना चाहिए। ऐसा करने से सभी तरह की कामनाएं पूर्ण होती हैैं।

ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि जिनका शुक्र ग्रह खराब हो उन्हें सदैव और तिथि विशेष पर जरूर गो सेवा करनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह विवाह, सुख-वैभव, ऐश्वर्य आदि का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए जो लोग कार्तिक शुक्ल अष्टमी पर संपूर्ण सिद्धियों के लिए माता की सेवा सत्कार करते हैैं, उनकी सभी तरह की मनोकामना पूरी होती है।

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