राजू श्रीवास्तव ने इस गांव में किया था अपना पहला स्टेज शो गजोधर नाम भी यही खोजा था

दुनिया को हंसाने वाले गुदगुदाने वाले राजू श्रीवास्तव ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया. राजू श्रीवास्तव की यादें उन्नाव से भी जुड़ी हुई है. उन्नाव के मगरायर गांव में राजू श्रीवास्तव का ननिहाल (Raju Srivastava maternal grandmother house) था. जहां उनका बचपन बीता और यही से शुरूआती शिक्षा हुई. राजू श्रीवास्तव ने पहला स्टेज शो में भी उन्नाव के मगरायर गांव में किया था. जहां उन्होंने खाएं के पान बनारस वाला गाना गा कर लोगों को सुनाया था.


राजू श्रीवास्तव के ननिहाल मगरायर में रहने वाले वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के निधन का बहुत दुख है. वेद प्रकाश ने बताया कि राजू बचपन में गांव आते थे और हम सब खूब खेला करते थे. यहां पर जब शिवरात्रि का मेला लगता था, तब राजू श्रीवास्तव ने पहली बार स्टेज शो किया था. राजू की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद अपनी मातृभाषा व यहां के लोगों को नहीं भूले थे. गजोधर नाम जो वह अपने शोज में लेते, वह व्यक्ति इसी गांव के रहने वाले थे.

वहीं, मगरायर गांव के रहने वाले हीरा लाल सोनी ने कि कहा कि राजू श्रीवास्तव 2011 में उनके घर आए थे. तब उन्होंने ने हमारे साथ ही खाना खाया था. उन्होंने आगे बताया वह राजू श्रीवास्तव से लगभग 10 से 12 साल छोटे हैं. उनके पिता से राजू श्रीवास्तव का काफी लगाव था. 1993 में राजू श्रीवास्तव की शादी हुई थी. हीरा लाल सोनी ने बताया कि राजू का तिलक व हमारी बारात दोनों एक ही दिन थे. इससे वह उनकी बरात में नहीं आए थे. राजू श्रीवास्तव की जब पहली बेटी हुई थी, तब उन्होंने हमारे यहां न्यौता भेजा था. हम हीरालाल सोनी के पिता राजू जी के यहां गए थे. मगरायर में ही राजू श्रीवास्तव ने स्टेज शो किया था, जिसमें उन्होंने “खईके पान बनारस वाला” गाना गाया था.


नवल किशोर बाजपेई ने बताया कि राजू श्रीवास्तव के निधन का हमे दुख है. वह हमारे गांव आते रहते थे. उन्होंने अपना पहला प्रोग्राम और ड्रामा यही मगरायर में किया था. नवल किशोर ने राजू श्रीवास्तव को याद करते हुए बताया कि जब वह बहुत बड़े कलाकार बन गए थे तो वह हमारे घर आए थे और तो दो घंटे का समय गुजारा था. तब हमने राजू जी ने कहा कि हमे कैसे विश्वास हो कि आप टीवी पर आते है तो आप ही बोलते है. तो राजू श्रीवास्तव ने हमें दस तरह की बोली बोलकर सुनाई. बस यही बात हमें राजू की बहुत याद आती है.

इनपुट ईटीवी बिहार

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