कूनो नेशनल पार्क में एक मादा चीते का नाम PM नरेंद्र मोदी ने रखा ‘आशा’, जानिए अन्य के नाम

कूनो नेशनल पार्क में आए चीतों का आज दूसरा दिन है। इन सभी चीतों के लिए यहां जंगल में माहौल नया है। जाहिर है इन्हें अभी यहां के माहौल में घुलने-मिलने में थोड़ा वक्त लगेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका के नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को इस पार्क में आजाद किया था। इस दौरान उन्होंने 4 वर्ष की मादा चीतें का नामकरण करते हुए उसका नाम आशा रख दिया था। अब आशा से उम्मीदें भी लोगों की टिकी हुई है कि वो अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या भी बढ़ाएगी।

चीता बिग कैट्स की 5 प्रजातियों में से एक प्रजाति है जो भारत से 70 साल पहले विलुप्त हो गए थे। आपको बता दें कि 1948 में चीता की प्रजाति देश से खत्म हो गई थी जिसके बाद 1952 में केंद्र सरकार ने चीता को विलुप्त प्रजाति में घोषित कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 72 वां जन्मदिन मनाते हुए 17 सितंबर 1922 को देश को रिटर्न गिफ्ट के तौर पर चीता दिए हैं। चीते अब वह धीरे-धीरे कूनो के माहौल में भी ढलने का प्रयास करने लगे हैं।

पहले दिन चीते खुद को नए परिवेश में देकर थोड़े सहमे रहे। लेकिन उनका आचरण सामान्य और सकारात्मक दिखाई दिया है। बताया जा रहा है कि सभी चीते आराम से नेशनल पार्क में घू रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क के प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल सभी चीतों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

एक अन्य मादा चीता दक्षिण-पूर्वी नामीबिया की दो साल की सियाया है। यह सितंबर 2020 से सीसीएफ में थी। एक अन्य मादा चीता 2.5 वर्षीय बिल्सी का जन्म अप्रैल 2020 में नामीबिया के दक्षिण-पूर्वी शहर ओमरुरु में एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में हुआ था। सबसे पुरानी और वरिष्ठ पांच साल की मादा चीता है। इसका नाम साशा है, जो सवाना की करीबी दोस्त है। सवाना उत्तर-पश्चिमी नामीबिया की एक मादा चीता है।

आराम करते नजर आए चीते

भारत में सात दशक पहले विलुप्त हुए चीतों की आबादी को फिर से बसाने की परियोजना के तहत नामीबिया से लाकर मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एक दिन पहले छोड़े गये आठों चीते रविवार को इस उद्यान में अधिकांश समय अपने-अपने विशेष बाड़े में विचरण एवं आराम करते हुए नजर आये। इससे लगता है कि वे धीरे-धीरे अपने नये परिवेश के वातावरण में ढल रहे हैं। इनकी निगरानी एवं अध्ययन कर रहे विशेषज्ञों ने बताया कि इसके अलावा, दूसरे दिन भी ये सभी चीते अपने नये बसेरे को बड़ी उत्सुकता से निहारते रहे और स्वस्थ एवं तंदुरूस्त दिखे।

बाड़े में रखा पानी पीया

उन्होंने कहा कि इन सभी को विशेष बाड़ों में एक महीने के लिए पृथक-वास पर रखा गया है और इन्होंने वहां रखा हुआ आज पानी भी पिया। भारत और नामीबिया के पशु चिकित्सक और विशेषज्ञ इन पर कड़ी नजर रख रहे हैं और एक महीने तक चलने वाले पृथक-वास की अवधि के दौरान उन्हें भैंस का मांस देने पर काम कर रहे हैं।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान के संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”लोग मानते हैं कि तीन दिन बाद चीता खाता है। एक बार शिकार कर लेगा और उसे खाने के तीन दिन बाद ही चीता दोबारा खाता है। चीते रोजाना भोजन नहीं करते। दो दिन पहले नामीबिया से भारत के लिये रवाना होने से पहले उन्हें भैंस का मांस दिया गया था।” उन्होंने कहा कि उन्हें आज भोजन दिया जाएगा। जब उनसे सवाल किया गया कि कल चीते सहमे हुए दिख रहे थे, अब कैसे हैं, तो इस पर शर्मा ने कहा, ”अब चीते सक्रिय हैं और उनका स्वास्थ्य ठीक है। वे अपनी दिनचर्या करते रहते हैं। इधर-उधर घूमते रहते हैं, बैठ जाते हैं, पानी पी लेते हैं।”

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