नाटक ‘धब्बा’ में दिखेगा मुजफ्फरपुर का बालिका गृह कांड

मुजफ्फरपुर . बच्चियों की चुप्पियों के बीच आंखों से झरते आंसुओं की दास्तान। हैवानियत की हद में डूबे इंसानी खाल में भेड़ियों की कहानी। दृश्य भले काल्पनिक, लेकिन सच की जमीन पर खड़ी दर्दनाक जिंदगी का दस्तावेज। बच्चियों के एक-एक पल को जीवंत करने वाला नाटक ‘धब्बा’ बालिका गृह कांड पर तैयार की गयी है। नाटक का ट्रीटमेंट व कलाकारों का अभिनय इतना शानदार कि देश-विदेश के 15 उत्कृष्ट नाटकों में शुमार किया गया है।

सुनील फेकानिया व शेखर सुमन की परिकल्पना व निर्देशन में तैयार 40 मिनट का माइम (बिना संवाद) नाटक इंडियन इंटरनेशनल माइम फेस्टिवल में शामिल किया गया है। पद्मश्री निरंजन गोस्वामी की टीम ने नाटक देखकर इसका चयन किया है। इसकी प्रस्तुति 27 मार्च को कोलकाता के सॉल्ट लेक में की जायेगी। आकृति रंग संस्थान की ओर से तैयार किये गये इस नाटक में शहर के कुणाल पटेल, अशोक अंदाज, अंबिका सोनी, अनुप्रिया कुमारी, राजू सहनी, रौशन सहनी, सत्यम कुमार सिंह, विजय सहनी व सूरज कुमार ने अभिनय किया है। तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद टीम नाटक प्रस्तुति के लिये तैयार है। कोलकाता में प्रदर्शन के बाद इसे शहर सहित दूसरे राज्यों में पदर्शित किया जायेगा।

सुनील फेकानिया के निर्देश में संस्थान ने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता, पटना सहित कई शहरों में नाटकों की प्रस्तुति कर वाहवाही बटोरी है

इंडियन इंटरनेशनल माइम फेस्टिवल में किया गया नाटक को शामिल

पद्मश्री निरंजन गोस्वामी की टीम ने देश-विदेश की 15 उत्कृष्ट नाटकों में दिया स्थान

बिहार से एकमात्र नाटक का चयन, कोलकाता में 27 मार्च को होगी प्रस्तुति

आकृति रंग संस्थान के कलाकारों ने तीन महीने की मेहनत से तैयार किया है नाटक

दृश्यों को जीवंत बनाता है माइम
निर्देशक सुनील फेकानिया कहते हैं कि बालिका गृह कांड से हमलोग काफी आहत थे। कलाकार होने के नाते मेरे दिमाग में कई परिकल्पना आती रही। बच्चियों के साथ इस तरह की अत्याचार की बात सोचकर ही शरीर शून्य हो जाता था। पहले संवाद के साथ नाटक लिखने की सोची, लेकिन इतने गंभीर विषय की अच्छी प्रस्तुति रंगों के मिश्रण से उभरने वाल भाव से ही संभव थी। बच्चियों के अत्याचार को थीम बना कर नाटक लिखी। दो महीने तक तो कलाकारों के साथ दूश्य संयोजन में लग गया। एक महीने हमलोगों ने खूब मेहनत की। जब इसका वीडियो क्लिप बना कर माइम फेस्टिवल के लिये भेजा तो वहां से नाटक चयिनत होने की स्वीकृति मिली। सुनील ने कहा कि इस नाटक में लाइट व रंगों का समन्वय है। भावों के जरिये कहानी चलती है। नाटक में बैकग्राउंड म्यूजिक का जरूरत के लायक ही इस्तेमाल किया गया है

स्टोरी – विनय कुमार (प्रभात खबर)

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